चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम
यतींद्र सिंह के मुताबिक, जहां बड़े और मंझले किसानों ने भाजपा के पक्ष
के वोट दिया, छोटे किसानों और मज़दूर कांग्रेस के पक्ष में रहे.
पाटीदार लंबे समय से भाजपा को वोट देते आए हैं.
यतींद्र सिंह कहते हैं, "किसान सरकार से नाराज़ हैं, इस सोच ने कांग्रेस को साथ लाने में मदद की लेकिन ऐसा नहीं है कि किसानों ने भाजपा को वोट नहीं दिया."
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को रिझाने के लिए कम ब्याज़ पर ऋण देना, भावांतर स्कीम जैसी योजनाएं लागू की.
भावांतर स्कीम में किसानों को सरकारी दाम और जिस दाम पर माल बिका, उसका अंतर दिया जाता है, लेकिन आरोप लगे कि बिचौलियों ने इस स्कीम का जमकर दुरुपयोग किया.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की दो लाख रुपए तक की कर्ज़ माफ़ी के वादे ने किसानों को उनकी पार्टी की ओर मोड़ा.
उन्होंने ये भी कहा कि अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री बदल दिया जाएगा. हालांकि सवाल उठ रहे हैं कि राज्य की आर्थिक खस्ताहाली के बीच ये वादा कैसे पूरा होगा.
आर्थिक मामलों के जानकार आरएस तिवारी के मुताबिक राहुल गांधी के वादों को पूरा करना संभव नहीं है.
वो कहते हैं, "राज्य सरकार आरबीआई से ऋण लेने की सीमा के बिल्कुल नज़दीक पहुंच गई है. अगर और कर्ज़ लिया गया तो वो सीमा पार हो जाएगी और ओवरड्राफ़्ट लेना होगा. कई किसानों ने इस कारण ऋण की किश्तें देने के साथ-साथ फसल बीमा का प्रीमियम देना बंद कर दिया है."
भाजपा को मालवा निमाड़ से बड़ी उम्मीद थीं लेकिन वहां 66 सीटों में पार्टी को इस बार पिछली बार से भी आधी सीटें यानी 28 सीटें ही मिलीं.
महाकौशल, ग्वालियर चंबल, मध्य भारत औऱ बुंदेलखंड में भी भाजपा को भारी नुकसान हुआ.
याद रहे मालवा निमाड़ में जनसंघ के वक़्त से ही आरएसएस का गढ़ रहा है और वहां भाजपा का अच्छा परफॉर्म ना कर पाना पार्टी के लिए चिंता का विषय होगा.
मालना निमाड़ इलाका यानी इंदौर, उज्जैन, खंडवा, बड़वानी जैसी जगहें.
भाजपा के बड़े नेता जैसे कैलाश जोशी, सुंदरलाल पटवा, वीरेंद्र कुमार सखलेचा, वीरेंद्र सखलेचा, सुमित्रा महाजन, कुशाभाऊ ठाकरे मालवा निमाड़ से आए.
संघ के सुरेश भैय्याजी जोशी का भी इसी इलाके से संबंध है.
ऐसे इलाके से भाजपा का खराब प्रदर्शन पार्टी के लिए चिंता का कारण होगा.
कांग्रेस ने पिछली बार की 11 सीटों की बजाय इस बार मालवा निमाड़ से 35 सीटें हासिल की.
यतींद्र सिंह के मुताबिक इलाके में आरएसएस काडर होने का ये मतलब नहीं कि वहां दूसरी शक्तियां मौजूद नहीं हैं और आरएसएस के लोग हर परिवार से भाजपा के पक्ष में वोट डालने के लिए मना पाएंगे.
पिछली बार दोनो पार्टियों के बीच करीब आठ प्रतिशत के वोट अंतर का फ़ासला था.
इस बार भाजपा का वोट प्रतिशत जहां करीब चार प्रतिशत गिरकर 41 प्रतिशत पहुंच गया, उधर कांग्रेस का वोट 36.38 प्रतिशत से बढ़कर 40.9 प्रतिशत पहुंच गया.
राज्य में कई लोगों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान का 'माई का लाल' वाला बयान भी भाजपा को भारी पड़ा.
आरक्षण पर जारी बयानबाज़ियों में एक बयान में शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि कोई माई का लाल देश में आरक्षण ख़त्म नहीं कर सकता.
बीबीसी से बातचीत में वरिष्ठ भाजपा नेता रघुनंदन शर्मा ने इस पर कहा था कि कई वर्ग के लोग इस बयान से नाराज़ हैं और इस कारण पार्टी को सीटों का नुकसान हो सकता है.
भाजपा की हार को लेकर कई कारण बताए जा रहे हैं. नोटबंदी, जीएसटी, और 15 सालों में शिवराज सिंह से बोरियत भी भाजपा की हार के कारण बताए जा रहे हैं.
बेरोज़गारी और शिक्षा में अच्छे स्तर के नहीं हो पाने के कारण राज्य के बच्चों को बाहर जाकर पढ़ना और नौकरी करना पड़ता हैं.
भाजपा नेता अर्चना चिटनिस कहती हैं, "ये नकारने वाले नतीजे नहीं हैं. लेकिन हमें आत्मचिंतन करने की ज़रूरत है."
पाटीदार लंबे समय से भाजपा को वोट देते आए हैं.
यतींद्र सिंह कहते हैं, "किसान सरकार से नाराज़ हैं, इस सोच ने कांग्रेस को साथ लाने में मदद की लेकिन ऐसा नहीं है कि किसानों ने भाजपा को वोट नहीं दिया."
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को रिझाने के लिए कम ब्याज़ पर ऋण देना, भावांतर स्कीम जैसी योजनाएं लागू की.
भावांतर स्कीम में किसानों को सरकारी दाम और जिस दाम पर माल बिका, उसका अंतर दिया जाता है, लेकिन आरोप लगे कि बिचौलियों ने इस स्कीम का जमकर दुरुपयोग किया.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की दो लाख रुपए तक की कर्ज़ माफ़ी के वादे ने किसानों को उनकी पार्टी की ओर मोड़ा.
उन्होंने ये भी कहा कि अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री बदल दिया जाएगा. हालांकि सवाल उठ रहे हैं कि राज्य की आर्थिक खस्ताहाली के बीच ये वादा कैसे पूरा होगा.
आर्थिक मामलों के जानकार आरएस तिवारी के मुताबिक राहुल गांधी के वादों को पूरा करना संभव नहीं है.
वो कहते हैं, "राज्य सरकार आरबीआई से ऋण लेने की सीमा के बिल्कुल नज़दीक पहुंच गई है. अगर और कर्ज़ लिया गया तो वो सीमा पार हो जाएगी और ओवरड्राफ़्ट लेना होगा. कई किसानों ने इस कारण ऋण की किश्तें देने के साथ-साथ फसल बीमा का प्रीमियम देना बंद कर दिया है."
भाजपा को मालवा निमाड़ से बड़ी उम्मीद थीं लेकिन वहां 66 सीटों में पार्टी को इस बार पिछली बार से भी आधी सीटें यानी 28 सीटें ही मिलीं.
महाकौशल, ग्वालियर चंबल, मध्य भारत औऱ बुंदेलखंड में भी भाजपा को भारी नुकसान हुआ.
याद रहे मालवा निमाड़ में जनसंघ के वक़्त से ही आरएसएस का गढ़ रहा है और वहां भाजपा का अच्छा परफॉर्म ना कर पाना पार्टी के लिए चिंता का विषय होगा.
मालना निमाड़ इलाका यानी इंदौर, उज्जैन, खंडवा, बड़वानी जैसी जगहें.
भाजपा के बड़े नेता जैसे कैलाश जोशी, सुंदरलाल पटवा, वीरेंद्र कुमार सखलेचा, वीरेंद्र सखलेचा, सुमित्रा महाजन, कुशाभाऊ ठाकरे मालवा निमाड़ से आए.
संघ के सुरेश भैय्याजी जोशी का भी इसी इलाके से संबंध है.
ऐसे इलाके से भाजपा का खराब प्रदर्शन पार्टी के लिए चिंता का कारण होगा.
कांग्रेस ने पिछली बार की 11 सीटों की बजाय इस बार मालवा निमाड़ से 35 सीटें हासिल की.
यतींद्र सिंह के मुताबिक इलाके में आरएसएस काडर होने का ये मतलब नहीं कि वहां दूसरी शक्तियां मौजूद नहीं हैं और आरएसएस के लोग हर परिवार से भाजपा के पक्ष में वोट डालने के लिए मना पाएंगे.
पिछली बार दोनो पार्टियों के बीच करीब आठ प्रतिशत के वोट अंतर का फ़ासला था.
इस बार भाजपा का वोट प्रतिशत जहां करीब चार प्रतिशत गिरकर 41 प्रतिशत पहुंच गया, उधर कांग्रेस का वोट 36.38 प्रतिशत से बढ़कर 40.9 प्रतिशत पहुंच गया.
राज्य में कई लोगों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान का 'माई का लाल' वाला बयान भी भाजपा को भारी पड़ा.
आरक्षण पर जारी बयानबाज़ियों में एक बयान में शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि कोई माई का लाल देश में आरक्षण ख़त्म नहीं कर सकता.
बीबीसी से बातचीत में वरिष्ठ भाजपा नेता रघुनंदन शर्मा ने इस पर कहा था कि कई वर्ग के लोग इस बयान से नाराज़ हैं और इस कारण पार्टी को सीटों का नुकसान हो सकता है.
भाजपा की हार को लेकर कई कारण बताए जा रहे हैं. नोटबंदी, जीएसटी, और 15 सालों में शिवराज सिंह से बोरियत भी भाजपा की हार के कारण बताए जा रहे हैं.
बेरोज़गारी और शिक्षा में अच्छे स्तर के नहीं हो पाने के कारण राज्य के बच्चों को बाहर जाकर पढ़ना और नौकरी करना पड़ता हैं.
भाजपा नेता अर्चना चिटनिस कहती हैं, "ये नकारने वाले नतीजे नहीं हैं. लेकिन हमें आत्मचिंतन करने की ज़रूरत है."
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